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टाटा ही नहीं कई बड़े दिग्गज करेंगे निवेश
कोलकाता। बंगाल के औद्योगिक इतिहास में मील का पत्थर माने जाने वाले सिंगूर को लेकर राज्य सरकार ने एक बार फिर बहुत बड़ा और ऐतिहासिक संकेत दिया है। राज्य के लोक निर्माण मंत्री अजय कुमार पोद्दार ने हुगली में एक बड़ा दावा करते हुए कहा है कि सिंगूर एक बार फिर से अपनी पुरानी पहचान हासिल करेगा और यह क्षेत्र औद्योगिक केंद्र के रूप में तेजी से विकसित होगा। उन्होंने साफ किया कि अब यहां केवल टाटा समूह ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के कई अन्य बड़े और प्रतिष्ठित उद्योगपति भी भारी-भरकम निवेश करने के लिए आगे आ रहे हैं। मंत्री के अनुसार, सिंगूर का औद्योगिक भविष्य बेहद उज्ज्वल है और आने वाले समय में यह इलाका राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित होगा।
मंत्री अजय पोद्दार शुक्रवार को पीएम मोदी के प्रस्तावित तारकेश्वर दौरे की तैयारियों और सभा स्थल का अंतिम जायजा लेने पहुंचे थे। प्रधानमंत्री 20 और 21 जून को दो दिवसीय दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरान 20 जून को पश्चिम बंगाल दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर वह तारकेश्वर में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मुख्य रूप से शामिल होंगे, जहां राज्य के लिए कई बड़ी और महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया जाएगा। सभा स्थल का बारीक निरीक्षण करने के बाद मंत्री ने कहा कि पीडब्ल्यूडी समेत सभी संबंधित विभागों के आला अधिकारी और इंजीनियर दिन-रात तैयारियों में जुटे हुए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि निर्धारित समय के भीतर ही मंच और पंडाल का काम पूरा कर इसे सुरक्षा एजेंसियों के हवाले कर दिया जाएगा। बारिश की आशंका पर उन्होंने कहा कि मौसम चाहे जैसा भी हो, प्रधानमंत्री की जनसभा अपने तय वक्त पर और ऐतिहासिक होगी।
बंगाल दिवस के गौरवशाली इतिहास पर बात करते हुए अजय पोद्दार ने विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि राज्य के असली इतिहास को लंबे समय तक भुलाने और दबाने की कोशिश की गई थी, लेकिन सच को कभी मिटाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बंगाल में औद्योगीकरण को पुनर्जीवित करना है। केवल सिंगूर ही नहीं, बल्कि पूरा बंगाल एक बार फिर सोनार बांग्ला बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।
गौरतलब है कि सिंगूर का नाम बंगाल की राजनीति में एक बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ रहा है। वाममोर्चा सरकार के शासनकाल में यहाँ करीब 997 एकड़ उपजाऊ भूमि का अधिग्रहण कर टाटा मोटर्स की मशहूर नैनो कार परियोजना लगाने की शुरुआत हुई थी, जिसे बंगाल के औद्योगिक पुनर्जागरण के तौर पर देखा जा रहा था।
मगर, तत्कालीन विपक्ष की नेता ममता बनर्जी के नेतृत्व में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ एक ऐतिहासिक आंदोलन छिड़ गया, जिसके चलते साल 2008 में टाटा को अपनी यह परियोजना सिंगूर से समेटकर गुजरात के सानंद ले जानी पड़ी थी। इसी आंदोलन की लहर पर सवार होकर 2011 में 34 साल के वामपंथी शासन का अंत हुआ था। विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना से बंगाल की औद्योगिक छवि को जो धक्का लगा था, उसे सुधारने के लिए सिंगूर में नए निवेश की यह घोषणा आर्थिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर बेहद गेम-चेंजर साबित हो सकती है।